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Joshi Sir Ke Saath Pehli Chudaai-2


मेरे जीवन का अगला चरण अब
शुरू हुआ जब अपने सहकर्मी
के कहने अनुसार में ऑनलाइन
गया. उस ज़माने में याहू
चैटरूम्स का ज़ोर था. वहां
पहुँच के मुझे लगा की मुझे
किसी ने साक्षात् स्वर्ग
में ही पहुंच दिया हो….

हर जगह सेक्स, चुदाई, चुसाई,
चटवाई, और मिल के अलग अलग
प्रकार की सम्भोग क्रियाओं
को करने के चर्चे में लोग
मगन थे. कुछ अपनी मनोकामनाओ
की घोषणा कर रहे थे, और कुछ
उनके चाहने वाले उनसे मिलने
का प्लान बना रहे थे…

शुरुआत में तो में सन्न रह
गया था, और सिर्फ औरों की
बात-चीत पढता रहा. पर धीरे
धीरे मुझमे हिम्मत आयी, और
मैंने भी लिखा, “क्या कोई एक
पतले दुबले २५ साल के
सांवले नवयुवक से मिलना
चाहेगा? मैं सिर्फ एक अच्छा
दोस्त ढून्ढ रहा हूँ.”

कई उत्तर आये, और उन में से
एक उत्तर उस इंसान का भी था
जो अबसे कुछ ही दिनों में
मुझे गे सेक्स का, एक अनुभवी
लुंड के माध्यम से परिचय
करेने वाले थे…

उनका नाम यहाँ में सिर्फ
जोशी जी ही बताऊंगा. उनका
पहला मैसेज जो आया वो था,
“मचयोर लण्ड चूसोगे?”. मैंने
एकदम से जवाब नहीं दिया,
क्योंकि और भी बहुत सन्देश
थे, और उस समय मैं ये भी शायद
अच्छे से नहीं जानता था की
“मचयोर” शब्द का अर्थ इस जगह
पर मानसिक परिपक्वता न होकर
बड़ी उम्र का होना होता है…

दो दिन बाद, जब में फिर याहू
चैटरूम में था तो जोशी जी का
फिर मैसेज आया, “चूस भी लो
यार; यहाँ लुंगी में तंबू बन
गया है.” यह सुन ने की देर थी
के जैसे मेरे शरीर में करंट
लग गया . यहाँ याहू पर मेरा
लुंगी-वाले मर्दों को
ढूंढने का शौक़ भी तो पूरा
किया जा सकता है!

मैंने डरते डरते उन्हें
लिखा, “क्या आप सच लुंगी
पहनते हो?”. जवाब तुरंत आया,
“और क्या”. मैंने कांपते
हाथों से लिखा, “आपके
प्रोफाइल नाम से तो नहीं
लगता है की आप साउथ इंडियन
हो?”

इस बार कोई जवाब नहीं आया. दो
मिनट के बाद मैंने फिर लिखा,
“बताइये न प्लीज.” कोई जवाब
नहीं… थोड़ी देर रुकने के
बाद मुझसे रहा नहीं गया, और
मैंने फिर मैसेज भेज, “आप
मेरी पसंद के हो, प्लीज सच सच
बताइये न, आप क्या पहनते हो
रात को बैडरूम में?”

उस रात जोशी जी ने कोई जवाब
नहीं दिया. मुझे लगा शायद
मज़ाक किया होगा; और मेरा
उतावलापन देख के पीछे हो गए
होंगे… मैंने उस दिन किसी
और से बात नहीं की, और थोड़ा
शर्मिंदा सा महसूस करते
हुए, रात के 11 बजे सो गया.

अगले दिन नेट खोल के बैठा तो
देखा, उनका जवाब आया था, रात
के दो बजे. “अरे यार, सिर्फ
मद्रासी लोग ही लुंगी नहीं
पेहेनते, यू पी में भी बहुत
सारे लोग पेहेनते हैं…” [उस
समय उत्तराखंड यू पी का
हिस्सा था.] “तुम बताओ, चूसते
हो शौक से? मुझे चुसवाईया
गांडू चाहिए.”

मैंने तुरंत जवाब टाइप
किया, “सर, मुझे ठीक से आता तो
नहीं, पर आप की शागिर्दी में
आना चाहता हूँ. फिर आप जो
मर्ज़ी सिखा दें…”

अब आगे की कहानी…

ऐसे ही फिर धीरे धीरे मुझे
जोशी-जी (मैं उन्हें जोशी सर
बुलाता था) रोज़ ऑनलाइन
मिलने लगे. मेरा मन उनसे बात
करने का, उन्हें बेहतर
जानने का, और उनसे मिल कर
दोस्ती करने का करता था.
हालाँकि उनकी तरफ से साफ़ था
की वो सिर्फ लन्ड चुस्वाने
के लिए नौजवान ढून्ढ रहे
हैं.

उन्होंने स्पष्ट कर दिया था
की वो शादीशुदा और स्ट्रैट
पुरुष हैं, जिनकी सेक्स
ड्राइव इतनी तीव्र है की
शादी की शुरुआत से ही उनकी
बेचारी पत्नी संभाल ही नहीं
पाती थी. शुरू मैं तो जोशी जी
दिन में उन्हें चार चार
बारी पेलते थे. जब भी मौका
मिला, उनकी साड़ी और अपनी
लुंगी उठाई और शुरू हो गए
धक्के लगाने…