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Joshi Sir Ke Saath Pehli Chudaai-4


जब मैं उनके आगे चल रहा था तो
मुझे लगा की जोशी सर की नज़र
मेरे नितंबों और कूल्हों पर
लगी है. मैंने उन्हें
बैडरूम से लगा हुआ बाथरूम
दिखाया तो वो अंदर चले गए.
मैं बाहर इंतज़ार करता हुआ
बिस्तर को सलीके से लगाने
लगा. परदे को बंद कर दिया. और
लाइट जला दी.

पहले बाथरूम में से उनके
पेशाब करने की आवाज़ आई, फिर
फ्लश चलने की. फिर करीब ४-५
मिनट तक वो अंदर रहे तो
मैंने सोचा, क्या कर रहे
हैं… तभी दरवाज़ा खुला और वो
बाहर आये.

उनके देख के मेरी सांस रुक
गयी. उlन्होंने थोड़े कपडे
बदल लिए थे. ऊपर वही सफ़ेद
शर्ट थी, पर अब नीचे पैंट की
जगह एक लाल, हरी और पीली रंग
की चेकदार लुंगी बाँध रखी
थी. मेरे लन्ड का आकार ऐसा हो
गया मानो फट जाएगा. वो सहजता
से मेरे पास आये और बोले,
“कैसा लगा मैं?”. मेरे होठों
से धीरे से निकल गया, “आप तो
सेक्स के देवता लग रहे हैं.”

वो ज़ोर ज़ोर से हँसे, और आ कर
बिस्तर पर बैठे. फिर बोले,
“तो मेरी पूजा कब शुरू
करेगा साले? चल आज अभी से काम
पे लग जा.”
मैं उनकी इस भाषा से और
उत्तेजित होता हुआ उनके पास
पहुंच कर साथ में बैठ गया.
समझ नहीं आ रहा था की क्या
करूं. उन्होंने ही पहल करी.

“अबे नीचे बैठ, और सुन, पहले
नंगा हो जा. मैं देखू तो ठीक
से कैसा है तू”

मैं शर्म से पानी पानी हुआ
जा रहा था. पर और कोई चारा
नहीं था. उनके सामने पहले
मैंने अपनी निकर उतारी. फिर
टी शर्ट. आधे मिनिट के अंदर
मैं उनके सामने निर्वस्त्र
खड़ा था.

“ह्म्म्म… बढ़िया. मुझे पतले
लड़के ही पसंद हैं. चल अब आजा.
शुरू कर.” उन्होंने हवस व कसक
भरे भाव से कहा. चेहरे पर
उनके अब मुस्कुराहट नहीं
थी.

मैं उनके आगे जा कर फर्श पर
नंगा बैठ गया. वो भी उचक कर
बिस्तर के छोर पर आ गए. धीरे
से बोले, “चल ना, निकल और काम
पर लग”. मैं समझ गया. हाथ बढ़ा
कर हलके से लुंगी की तरफ
बढ़ाये. उन्होंने मेरे हाथ
पकडे और अपनी गोद में रख कर
दबा दिए…

वो लुंगी बड़ी नरम और मुलायम
थी, और उसके अंदर मुझे उनका
सख्त लोड़ा महसूस हुआ. वो
अंडरवियर पहने थे. खुद ही
जोशी जी मेरे हाथ लुंगी के
ऊपर से ही लन्ड पर रगड़ने लगे.
मैं उनके आघोश मैं खोता जा
रहा था. उनके बदन से शेविंग
क्रीम और साबुन की सुगंध आ
रही थी, जैसे अभी नहाये हों.

थोड़ी देर के बाद उन्होंने
लुंगी थोड़ी सी खोली, और मेरे
हाथ अपने आप अंदर चले गए.
अंदर उनकी सफ़ेद फ्रेंची
अंडरवियर थी. उन्होंने कमर
उठा कर इशारा किया तो मैंने
फ्रेंची जाँघों तक नीचे
करी. और फिर उन्होंने खुद
थोड़े खड़े हो के परियों से
निकाल दी. लुंगी अब थोड़ी
ढीली हो गयी थी.