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Joshi Sir Ke Saath Pehli Chudaai-5


जोशी जी फिर बैठ गए. उनका
करीब 5.5 इंच का तना हुआ लन्ड
मेरे सामने आ गया. ऊपर घने
काले सफ़ेद बालों से वो सख्त
डंडा सीधा बाहर आ रहा था.
चमड़ी आगे तक थी, ऊपर से गोरी,
पर आगे जहाँ वो एक गुच्छे
में थी वहां सांवली. लोडे के
अंत की इक्कट्ठी हुई चमड़ी
से कुछ बूँदें वीर्य की अभी
से धागा बनाती हुई टपक रही
थी.

पूरे लन्ड में से एक अजीब सी
महक आ रही थी, जैसे की
इस्तेमाल करे हुए तौलिये या
अंडरवियर से आती है, भीनी
भीनी.
अचानक उन्होंने एक हाथ मेरे
सर पे लगाया और मुझे आगे
झुकाया. यही वो पल था, जब मैं
पहली बार उन्हें चखने वाला
था. मुझे अचानक बड़ी घिन्न
आयी और मैंने सर पीछे किया.

अपने दोनों हाथों से मैंने
उस सुन्दर लन्ड को पकड़ा और
चमड़ी ऊपर नीचे करने लगा.
उन्होंने अचानक मेरा कान
पकड़ा और बोले, “मादरचोद, हाथ
से नहीं, मुंह से निकाल.”

फिर से उन्होंने मेरा सर
अपने लन्ड की तरफ धकेल दिया.
इस बार मेरे होठ उस गरम दंड
को छू गए. मैंने फिर एक गहरी
सांस ली और अपनी मन की बात के
आगे समर्पण कर दिया. पहले
पूरे लन्ड को नीचे के बालों
से लेकर ऊपर के छेद तक
चुम्बन लिया. छेद से गीला
गीला वीर्य मेरे होठों को
छुआ. दो तीन बार चूमने के बाद
उन्होंने फिर सर को धक्का
दिया. इस बार विरोध त्यागते
हुए मैंने मुंह खोल कर उस
लन्ड को अंदर ग्रहण किया.
बिना मुझे सोचने का मौका
देते हुए उन्होंने अपना
औज़ार पूरा का पूरा मेरे गले
में उतार दिया. चूंकि वो
सिर्फ ५-६ इंच का था, में भी
उसे पूरा निगल गया. एक बारी
मन में विचार तो आया, की अभी
५ मिनिट पहले ही इन्होंने
इसी मैं से पेशाब निकाला है.
पर उस विचार को मैंने दबा
दिया. और अपने सर को उनके
लन्ड पर ऊपर नीचे करने लगा.
जीभ फिराई, होठों और गालों
से घर्षण दिया, सब कुछ जैसे
मैंने सेएक, पढ़ा या देखा था.

५ मिनिट बाद मेरी गर्दन
दुखने लगी. तो जोशी सर ने
मुझे मुंह हटाने दिया. वो
उठे और आराम से बिस्तर पर
लेट गए. टांगें चौड़ी कर लीं.
लुंगी दोनों तरफ खुल गयी. अब
में भी उनके मन की बात समझने
लगा था. आराम से उनकी हलके
हलके बालों वाली जाँघों के
बीच जा कर बैठ गया और फिर
शुरू हो गया. अब उनकी चमड़ी
थोड़ी पीछे हो गयी थी. सुर्ख
लाल रंग का उनका सुपाड़ा
बाहर झांक रहा था. वीर्य की
बूँद टपकने को तैयार थी.
मैंने अपनी जीभ से उस बूँद
को चाट लिया. नमकीन स्वाद से
मेरे पेट ने एक मरोड़ा लिया,
पर किस्मत से मैंने नाश्ता
हल्का लिया था, वरना शायद
बाहर आ जाता. मैंने फिर
हिम्मत कर के लन्ड को मुंह
में भरा और जीभ और होठों से
उनके सुपाड़े को उभारने लगा.
मन में ब्लू फिल्मों को याद
कर के जोशी सर के
गुप्तांगों को तन्मयता से
चाटने लगा. मुझे सच में लगा
के मुझे जिस काम के लिए
भगवान् ने बनाया है वो मैं
अच्छे से कर रहा हूँ.

ऐसे ही चुसाई करते करते
अचानक जोशी जी ने अपनी कमर
को झटके देने शुरू किये.
अनुभवहीन होने के कारण में
समझ नहीं पाया की वो अब अपना
झरना बहाने वाले हैं. उनके
मुंह से भी हलकी हलकी
गुर्राने जैसे आवाज़ें आने
लगीं. एकदम से जब उनके लन्ड
का सुपारा थोड़ा फूला और
नमकीन खीर जैसे पहला उनका
बहाव मेरे तालु से टकराया
तो मुझे सुध आयी. मैं एकदम से
पीछे हुआ, पर तब तक दो और
शॉट्स मेरे होठों और गालों
पर गिर गए. में झेंपता हुआ
बाथरूम भाग, और उनके वीर्य
को थूकने लगा. फिर कुल्ला और
गार्गल करने लगा.

दो – चार मिनिट बाद जब मैं
मुड़ा तो देखा सर लुंगी
बांधे, दरवाज़े पर कन्धा
टिकाये मुझे प्यार से देख
कर मुस्कुरा रहे हैं. बोले,
बहुत अच्छे हो तुम यार, मुझे
बहुत अच्छा लगा. धीरे धीरे
मेरे पानी को पीना भी सिखा
दूंगा.

मेरे मन में भी मेरे पहले
चोदू के लिए प्रेम उमड़ आया.
मैं आ कर उनसे लिपट गया.

उस दिन फिर उन्होंने दो और
बारी मेरे से मुख मैथुन
कराया. में खुद एक बार भी
नहीं झड़ा. शाम के करीब ३ बजे
हम थक कर हल्का खाना खा कर एक
दुसरे से लिपट कर सो गए… ५
बजे हम उठे, और वो हाथ मुंह
धो कर, कपडे पहन कर अपने घर
चले गए. लुंगी मेरे यहाँ ही
छोड़ गए, “धुलवा के रखना, अगली
बार के लिए…”

तो यह थी दोस्तों मेरी पहली
प्रेम-मिलाप की कहानी. यदि
पसंद आये, या न भी आये तो
कमैंट्स मैं बताना. या फिर
[email protected] पर मुझे लिख कर
बताना. आजकल में चंडीगढ़ में
पोस्टेड हूँ, परिवार अभी भी
बनारस में है. अब मेरी उम्र
३५ वर्ष है. कोई जोशी जी जैसे
देसी पुरुष मुझसे मिलना
चाहें तो अवश्य लिखें. पर
याद रखें मैं लड़कियों जैसा
नहीं हूँ.

नमस्कार, आपका,

राजेन्द्र भारद्वाज