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Meri asli sex kahani-1


हैल्लो दोस्तों, में आज आप
सभी को अपने सबसे अच्छे
सेक्स
अनुभव के बारे में बताने जा
रहा हूँ जिसमें मैंने अपने
पड़ोसी डॉक्टर की मस्त
सेक्सी पत्नी को चोदा। में
लखनऊ में रहता हूँ और में
दिखने में एकदम अच्छा
हूँ और में पिछले बहुत
सालों से सेक्सी कहानियाँ
पढ़कर उनके मज़े लेता आ रहा
हूँ। अब में
सीधे अपनी उस घटना को
सुनाता हूँ जिसको पढ़कर आप
लोगो को जरुर मजा
आएगा। दोस्तों मेरे घर के
पास में ही
एक घर में छोटा सा क्लिनिक
है वो क्लिनिक
नीचे है और उसके ऊपर के
हिस्से में
उसके डॉक्टर साहब रहते है।
उनका नाम
सलीम है और उनकी
उम्र करीब 30-32 के आसपास
होगी उनकी पहले
भी एक शादी हो
चुकी थी, लेकिन उन दोनों
पति पत्नी के बीच में
बहुत बार ना जाने किस बात को
लेकर झगड़ा हुआ
और अब उनका तलाक भी हो चुका
है
और अभी एक साल पहले
उन्होंने
दूसरी शादी
की है, वो भी
अपनी पसंद से। उनकी
पत्नी सच में दिखने में
बहुत
ही सुंदर है। उनका घर मेरे
घर के पास
में ही है इसलिए में अक्सर
उनको देख
ही लेता हूँ। दोस्तों शादी
के बाद करीब 4-6
महीने तक तो उनकी नई
पत्नी घर से बाहर
आती ही
नहीं थी, लेकिन बाद में
धीरे धीरे वो बाहर आने
लगी, उनके घर में पति
पत्नी और एक नौकरानी
है और वो नौकरानी तो सुबह
शाम को
आकर उसका काम खत्म करके
अपनी
घर पर चली जाती है
और उसके चले जाने के बाद
डॉक्टर
सलीम और उनकी
पत्नी पूरे घर में अकेले
ही रहते है और अभी
उनकी नई नई शादी हुई
है इसलिए उनके घर में अभी
कोई
बच्चे भी नहीं है।
दोस्तों सलीम कहने को तो एक
डॉक्टर
है, लेकिन वो बहुत ही पतले
दुबले
आदमी है और उनकी
पत्नी उनके शरीर से
बिल्कुल उलटी है, उनका
जिस्म बहुत
ही भरा हुआ है और उनके बूब्स
की ऊँचाइयाँ उनकी
सुन्दरता को और भी बड़ा
देती है, क्योंकि वो मेरे घर
के पास वाले
घर में रहते थी इसलिए
मेरी उनसे हर कभी
बातचीत तो होती
ही रहती
थी और में उन्हे नजमा
भाभी कहता था।
दोस्तों शादी के कुछ दिनों
तक तो सब कुछ
ठीक चल रहा था, लेकिन कुछ
ही समय के बाद उन दोनों में
हर एक
छोटी छोटी बातों को लेकर
लड़ाई, झगड़े होने लगे थे,
जिसमें मुझे बाद में नजमा
भाभी से पता चला यह बात
उन्होंने
मुझे कही। दोस्तों में एक
बार और बता
दूँ कि उनकी छत मेरी
छत के बराबर है, मतलब हम
दोनों की
छत के बीच में बस एक
दीवार का ही फासला है,
लेकिन उनकी छत पर भी
एक रूम भी बना हुआ है और यह
अभी तीन
महीने पहले की बात
है। उस समय गर्मियो के दिन
थे और कुछ ज्यादा
ही गर्मियां थी, इसलिए
हम लोग कभी कभी
ऊपर छत पर सोने चले जाते थे
और उस दिन
भी ठीक वैसा
ही हुआ। में जब उस रात को
अपनी छत पर सोने गया तो
मैंने देखा कि
पास की छत पर डॉक्टर साहब
की पत्नी जिनका नाम
नजमा था वो भी उनकी
छत पर खड़ी हुई थी
और वो किसी सोच विचार में
लगी हुई थी। उस समय
उन्होंने मेक्सी पहन
रखी थी और वो बहुत
ही हल्की और
जालीदार मेक्सी
थी, जिससे उनके शरीर
के गोरे अंगो को बाहर से भी
देखा जा
सकता था, लेकिन उस समय छत पर
बहुत कम
रोशनी होने की वजह से
में उनके शरीर को ठीक
तरह से देख नहीं पा रहा था,
लेकिन
कुछ भी हो वो मुझे थोड़ी
दूर से ही सही, लेकिन
बहुत अच्छी लग रही
थी इसलिए में हमेशा उनसे
बातें करने के
नये नये मौके देखा करता था।
उस रात को
भी मैंने ठीक वैसा
ही किया और मैंने सही
मौका देखकर उनसे बातें करना
शुरू किया और मैंने उनसे
पूछा कि नजमा भाभी क्या आप
लोगों ने
खाना खा लिया? तो उन्होंने
कहा कि हाँ हमारा खाना
पीने का काम तो खत्म हो गया
है बस
अब में सोने की तैयारी कर
रही हूँ। तभी मैंने
उनसे पूछा कि क्या आप लोग हर
रात को ऊपर छत पर
ही सोते है? तब उन्होंने कहा
कि
हाँ, लेकिन कभी कभी
जब कभी नीचे
गर्मी ज्यादा होती है तो
हम दोनों छत पर ही सो जाते
है। अब
मैंने उनसे पूछा कि सलीम
भाई कहाँ है
क्या वो नीचे है या कहीं
बाहर गये है? तब उन्होंने
मुझसे कहा कि कुछ देर
पहले मेरे साथ खाना खाकर वो
तो अपनी
बहन के यहाँ पर गये हुए है,
उन्हें कोई
जरूरी काम था और वो कल सुबह
तक
वापस आ जाएँगे, तब मैंने
उनकी
पूरी बात को सुनकर उनसे पूछ
लिया तो
क्या आप आज घर में अकेले है?
वो तुरंत
बोली कि हाँ और तब मैंने
उनसे पूछा कि
क्या आपको अकेले में इतने
बड़े घर में रहने में डर
नहीं लगता? तो नजमा
भाभी ने मुझसे कहा कि हाँ
नीचे मुझे बहुत डर लग रहा था
इसलिए तो में छत पर चली आई
और
अब मुझे नींद भी
नहीं आ रही है। फिर
मैंने उनसे कहा कि हाँ मुझे
भी तो
नींद नहीं आ
रही है और फिर उन्होंने
मुझसे कहा
कि तुम एक काम करो तुम भी
मेरी छत पर आ जाओ और हम
दोनों
थोड़ी देर बैठकर बातें
हंसी मजाक करते है उसके बाद
जब
तुम्हे नींद आने लगे तो तुम
सोने चले
जाना और अब में मन ही मन
बहुत
खुश होकर उनके कहने पर उनकी
छत पर उस दीवार को खुदकर चला
गया
और उन्होंने मेरे जाते ही
उस रूम के
अंदर से एक छोटा सा पलंग
बाहर निकाला और मुझसे
कहा कि हाँ चलो अब बैठ जाओ हम
बैठकर बातें
करते है और में उनके कहने पर
उस बेड पर बैठ
गया तो वो भी मेरे पास में
आकर बैठ गई
और हम लोग पहले तो ऐसे ही
इधर
उधर की बातें और हंसी
मजाक करते रहे मुझे उनसे आज
पहली बार इतनी पास
बैठकर बातें करना बहुत
अच्छा लगा और में मन
ही मन बहुत खुश था क्योंकि
यह मेरा
उनसे बिल्कुल पास चिपककर
बैठने का मौका पहला था।
फिर अचानक से उन्होंने
मुझसे पूछा कि अब आप मुझे
सच सच यह बात बताइए कि आपकी
कितनी गर्लफ्रेंड्स है? तो
मैंने उनसे
कहा कि अगर में सच बताऊँ तो
मेरी
गर्लफ्रेंड एक भी नहीं
है। तभी उन्होंने मुझसे कहा
कि
इसका मतलब आपने कभी
भी अपनी लाइफ में कोई
मज़ा मस्ती नहीं किया?
तब मैंने उनसे कहा कि नहीं
ऐसी कोई भी बात
नहीं है मैंने मज़े और
मस्तियाँ तो
बहुत बार किया है। फिर वो
मुझसे पूछने
लगी कि किस तरह का मज़ा किया
है ज़रा
हमें भी तो बताए हम
भी तो सुने आपकी
कहानी कि आपने अब तक कैसे
कैसे
मज़े लिए है जरा खुलकर हमें
बताए? अब उनके इस
सवाल को सुनकर में थोड़ा सा
शरमा गया और में मन
ही मन सोचने लगा कि अब में
क्या
जवाब दूँ और इनको क्या
बताऊँ और मैंने अपना सर
नीचे झुका लिया। तभी वो
मुझसे बड़े ही प्यार से
मेरे सर पर
हाथ फेरते हुए कहने लगी कि
अरे
लगता है तुम तो मुझसे शरमा
रहे हो और तुम तो मुझे
हमेशा अपनी भाभी
कहते हो तो फिर मुझसे कैसा
शरमाना? और अब
उनका हाथ धीरे धीरे मेरे
सर से मेरे गालों पर आ गया था
और वो बड़े प्यार से मेरे
गालों पर अपना हाथ फेर रही
थी। फिर मैंने महसूस किया
कि उनके
हाथ बहुत ही मुलायम थे और जब
उन्होंने मेरे गालो को अपने
नरम हाथों से छुआ तो मेरे
पूरे शरीर के अंदर एक
अजीब सी
सनसनी होने लगी
थी, जिसकी वजह से में
और थोड़ा सा पीछे हटकर बैठ
गया और
वो समझ गई कि में अब भी शरमा
रहा
हूँ। तभी उन्होंने अचानक से
एक बार
फिर मुझसे पूछा कि क्या
आपने कभी
किसी लड़की या औरत को
नंगा देखा है? तो दोस्तों
में उनके मुहं से यह बात
सुनकर बहुत ज्यादा चकित
हुआ, क्योंकि मुझे बिल्कुल
भी विश्वास नहीं हो
रहा था कि में कभी उनके मुहं
से ऐसे
भी शब्द सुन सकता हूँ और वो
मुझसे
क्या कभी ऐसे भी सवाल
पूछ सकती है और मुझसे एकदम
खुलकर बातें भी कर
सकती है। मेरे दिमाग में इस
तरह के
बहुत सारे सवाल घर कर रहे थे,
लेकिन मैंने मन
ही मन सोचा कि जब उसको मुझसे
यह
बात पूछने में किसी भी
तरफ की कोई झिझक कोई शरम
नहीं है तो में क्यों करूं?
और फिर मैंने
बहुत खुश होकर कहा कि हाँ
देखा तो है, लेकिन
कभी जी भरकर
नहीं देख पाया और वैसे तो
में ब्लूफिल्म
में कितनी बार देख लेता हूँ,
लेकिन जो
मज़ा अपनी आखों के सामने
देखने में है
वो फिल्म में नहीं है। फिर
मेरी बातें सुनकर वो हंसते
हुए बोले कि
क्यों आप बातें तो बहुत
अच्छी कर लेते
हो? मैंने कहा कि अगर आप जैसी
कोई
सुंदर औरत सामने बैठी हो तो
बातें खुद
ही अच्छी हो
जाती है और वो बातें आप
जैसी परी को
अच्छी लगने लगे तो हम जैसो
की किस्मत तो चमक ही
जाए और अब मैंने महसूस किया
कि बातें करते करते
नजमा भाभी का हाथ अब मेरे
गालों से
नीचे सरकता हुआ मेरी
छाती तक आ गया था और वो
मेरी छाती पर हाथ फेरते
हुए बड़े ही प्यार से मुझसे
कहने
लगी और पूछने लगी
क्या तुमने कभी किसी के
साथ चुदाई की है? दोस्तों
नजमा
भाभी के मुहं से एकदम से
चुदाई जैसे
शब्द सुनकर में तो एकदम
चकित हो गया क्योंकि मुझे
विश्वास नहीं था कि वो
इतनी जल्दी मुझसे यह
सभी बातें भी पूछ
सकती है? इसलिए में बहुत
घबरा गया
और मैंने अपना सर नीचे झुका
लिया। फिर
उसके बाद वो मेरी जाँघो पर
अपना एक
हाथ फेरते हुए मुझसे कहने
लगी कि
में बहुत दिनों से अकेली
हूँ क्या आप
मेरा साथ देंगे? दोस्तों तब
मैंने पहली बार
अपनी भाभी
की आँखो में आखें डालकर
उनकी तरफ देखा तो सच में
उनके
चेहरे में उस समय एक बहुत ही
अजीब ही कशिश
थी इसलिए अब में बिना कुछ
कहे
भाभी के चेहरे को अपने
हाथों से
अपनी तरफ खींचते हुए
उनके नरम गुलाबी होंठो पर
किस करने
लगा। तब उन्होंने अपनी
दोनों आँखे बंद
करके अपने आप को बिल्कुल
फ्री छोड़
दिया जिसकी वजह से उनका
पूरा
शरीर मेरी बाहों में झुला
झूलने लगा और तब में बहुत
जल्दी
समझ गया कि आज की रात मुझे
जन्नत
की सेर करने का वो मौका
मिलेगा जिसका
मुझे बहुत लंबे समय से
इंतजार था। मतलब
भाभी की चुदाई
पक्की थी।

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