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नेता की बीवी को पैसे लेके-1


किस्मत कभी-कभी आपको किसी
पराये के इतना करीब ला देगी
यह आपको इस कहनी में पता
चलेगा। और अगर आपको ये
कहानी पसंद आती है तो मुझे
vijaycbr5907@gmail.com रेस्पोंस दे

यूजर के मेल
चेक करने के दौरान मुझे
किसी सुनीता नाम से मेल
मिला उन्होंने अपना पता
दिया और कहा- इस जगह पर आ
जाना, 5000 दूंगी।और मेरी एक
पुरानी मित्र रश्मि का
रेफरेंस दिया।
आप यकीन नहीं मानोगे वो पता
मेरे घर के पास रहने वाली
सुनीता भाभी का था, सुनीता
एक शादी शुदा और दो बच्चो की
माँ है और किसी जनकल्याण
संस्था में काम करती है,
मुझसे करीब दस साल बड़ी
यानि 33-34 साल की… लेकिन उसे
देखकर लगता है कि उनकी कमर
26-28 की होगी, गोरा रंग, 34-30-36 का
फिगर, उनके बाल लंबे हैं,
कूल्हों तक आते हैं, खुले
बाल लेकर जब वो कूल्हे
मटकते हुए चलती है तो आग सी
लग जाती है या खुले शब्दों
में यों कहो क़यामत साथ
चलती है…

मुझे उनकी नज़रों से हमेशा
लगता था कि वो मुझे चाहती
है। मेरे सामने उनकी हरकतें
बड़ी मादक होती थी,
छेड़छाड़ और मज़ाक वगैरह,
कभी कभी वयस्क चुटकले भी,
लेकिन मुझे मोहल्ले में
रहना था और उनके पति
राजनीतिक आदमी थे, भला मैं
क्यों अपनी हद पार करता। पर
अब उस मेल आने के बाद मैंने
तय किया कि चलो इनके पास भी
जाकर चूत का रसपान किया
जाये, और यदि शिकार खुद आ रहा
है तो शिकारी को हर्ज ही
क्या है।

तभी मैंने सोचा इनके घर पर
कैसे इन्होंने बुलाया, कहीं
पिटाई तो नहीं करवाएगी?

उस दिन मैंने सुबह देखा कि
सुनीता भाभी के पति सामान
पैक करके अपने दोनों बच्चों
और उनकी माताजी के साथ कहीं
जा रहे थे, साथ में अपने लाव
लश्कर को भी ले जा रहे थे।

मैं ठीक समय पर उनके घर पर
गया, उनका घर दोमंजिला है,
मैं वहाँ पहुँचा तो आवाज़
दी- भाभी…!!

कोई आवाज़ नहीं आई..

फ़िर दरवाज़ा खटखटाया.. तब
हल्की सी आवाज़ आई- रुको, मैं
आती हूँ।

थोड़ी देर में दरवाजा खुला..
उफ़ ! भाभी के बाल थोड़े
बिखरे हुए उनके चहरे पर आ गए
थे और सीने पर दुपट्टा नहीं..
क्या मस्त चूचियाँ हैं…

मेरे कुछ बोलने से पहले ही
वो बोली- तुम्हारे भाई साहब
तो 4-5 दिन के लिए किसी
सम्मेलन में गए हैं, ज्यादा
जरुरत हो तो उनको कॉल कर लो।

मैंने कहा- नहीं, वो दरअसल
मुझे आपसे ही काम है।

उन्होंने कहा- मुझसे क्या
काम है?

तब मैंने उनको अपना असली
नाम बताया और मेल वाली
कहानी बताई तो कुछ देर के
लिए तो वो शरमा गई और मुझे
नजरें नहीं मिला पाई थी।

करीब 5 मिनट बाद वो खुलकर
सामने आई और कहा- तो आप ही
असली आदमी हो जो महीने भर से
जानते हुए भी जताया तक नहीं
और मेरे घर के पास रह रहे हो?
खैर मैंने तुम्हारा वो देख
रखा है, तुम्हारी फेसबुक की
आईडी पर है और मुझे रश्मि ने
सब कुछ बता दिया है। चलो अब
अन्दर चलो, मैं चाय बनाती
हूँ..

अब सुनीता का रंग बदला-बदला
सा लग रहा था। मैं चुप रहा और
उन्हें देखता रहा !

चाय पीने के बाद सुनीता ने
ब्लू फिल्म लगा दी और आकर
बिस्तर पर बैठ गई, करीब 15-20
मिनट तक हम दोनों एक दूसरे
के बदन को रह-रह कर नोचते
रहे।

मैंने हाथों से उनकी
चूचियाँ जोर से दबाई तो
उनकी आवाज निकली- आआह्ह्ह
धीईरे !

यह सुन कर मैं समझ गया कि
सुनीता चुदवाना तो बहुत
चाहती है… लेकिन बड़े आराम
से ! किसी भी प्रकार की कोई
जल्दबाजी नहीं..

इधर मैं पूरे उफान पर था।

मैंने उसे अपनी गोदी में
खींच लिया, वो भी अपनी गांड
मेरे लंड पर दबा रही थी।

मैंने उनकी कमीज़ के अंदर
पीछे से हाथ डाल दिया.. नर्म
बोबों से होता हुआ मेरा हाथ
सीधे ब्रा के हूक पर गया।

मैंने उसे जोर से खींचा तो
वो टूट गया…

“इतनी जल्दी है क्या…?”

और वो घूम गई, मैंने इस मौक़े
का फ़ायदा उठाया और एकदम
उनका चेहरा पास आया तो उनके
रसीले लाल होंटों पर अपने
होंट चिपका दिये.. वो लम्बा
चुम्बन .. गीला… ऊ ओह .. और
भाभी मुझसे दूर हटने लगी..