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Sagi bahen ki Chudai-1


नमस्कार मेरे प्यारे
दोस्तो कैसे है आप,
मै आपका दोस्त रविराज उर्फ़
राजेश
फ़िर एकबार एक नई कहानी के
साथ हाजीर हू।
ईस बार मै आपको बताने वाला
हू की कैसे
मैने अपनी दिदी को बस मे
चोदा और एक
नया अनुभव लिया। दोस्तो मै
आपको ये बताना
चाहूंगा की बस मे तो क्या पर
किसीभी गाडी मे
किसी लडकी को चोदना आसान
नही है।
पर मैने ये काम कर दिया है,
मैने मेरे दिल कि बात आपके
सामने
रख दि है, कैसे लेना है ये
तुम तय करो।
लेकिन मै फ़िर एक बार बताना
चाहता हू की
इस काहानी का एक एक लब्ज सच
है।
मुझे लगता है आपको ये पसन्द
आयेगी।
अब मै तुम्हारा जादा टाईम
ना लेते हुये
सिधा अपनी कहाणी पर आता हू,
आप सबको तो मालुम ही है की मै
कितना चुद्दकड हू।
और मेरे चुदाई की शुरुवात
मेरी अपनी दिदीसे हुई है।
मुझे मेरी दिदीने मुझे
चोदना सिखाया है।
जब मै आठवी कक्शा मे पढ्ता
था।
मेरी बहुत सारी कहानीया
उपल्बध है,
मेरी बाकी कहानीयोंकी
जानकारी के लिये
आप मुझे मेल भी कर सक्ते है,
आपको ये भी मालुम है की मुझे
दो बहने है,
और दोनो भी बडी चुद्दकड है।
वो दोनो हर रात मुझसे
चुदवाती थी।
मेरा एक भी दिन उन्हे चोदे
बगैर नही जाता था।
और एक बात,आपने मेरी पिछली
कहानी मे पढी होगी,
हर दिवाली को मेरी मोसेरी
बहन सुमन हमारे घर आती थी,
उसे भी मेरी दिदीने मुझसे
चुदवाया था।
वो भी मेरे लंड की दिवानी
थी।
मै अकेला और मेरी तिन
बहने,मेरा एक लंड और
मेरी तिन दिदीयोंकी तिन
चुत, वो दिन बहुत खास थे।
तो प्यारे दोस्तो मैने
आपको पिछली कहाणी मे बताया
था,
मेरी दोनो बहनोंकी शादी हो
चुकी थी।
और मेरे बडे भैय्या की भी छे
महिने
के पहले शादी हो गयी थी।
उसकी बिवी यानी मेरी भाबी
भी एकदम
मेरे दिदी जैसी खुबसुरत थी।

एकदम पटाखा माल्। बडी
चुद्दकड्।
उसके बडे बडे मम्मे, गुलाबी
ओठ,
नाजुक कमर और उसकी फ़िगर
देखकर मुझे
मेरी दिदी की बहुत याद आती
थी।
लेकीन मै कुच्च भी नही कर
सकता था।
मेरे पास चुदाई का कुछ भी
जुगाड नही था।
और चुत के बिना मेरा कही भी
दिल नही लगता था।
क्या करे मेरे कुछ समझ मे
नही आ रहा था।
ऐसे ही दिन गुजर रहे थे।
मै हर रात चोरीसे भैय्या
भाबी की चुदाईके सिन
देख कर मुठ मारके सो जाता
था।
मै हमेशा सोचता था, भाबी को
कैसे पटाया जाये,
गर्मियोंकी छुट्टीयोमे
मेरी महाचुद्दकड बहन
स्वाती दिदी हमारे घर
कुछ दिनोंके लिये आनेवाली
थी।
मै बहुत खुश था। क्युंकी
दिदी की मदद से मै
भाबी को चोदना चाहता था। और
मुझे पुरा यकीन था,
मेरी दिदी ईस काम मे माहिर
थी।
किसीको भी किसिसे चुदवाना
दिदीके बाये हाथ
का खेल था। जैसे उसे माहरत
हासिल थी।
मेरी दिदी एकदम पटाखा माल
थी।बडी चुद्दकड्।
अगर उसे कोइ बुड्डा भी देखे
तो
उसका लंड जरुर खडा होता था।
दिदी को घर लाने की
जिम्मेदारी मेरी थी।
मैने माँ को बता दिया की उसे
लेने
के लिये मै कल जानेवाला हू।
माँ को कुछ ऐतराज नही था।
माँ ने हा कर दी।
और मेरी मम्मी ने दिदी को
मेरे आने की खबर दे दी।
लेकीन मेरे से एक दिन का
इंतजार नही हो रहा था,
फ़िर उसी दिन मै दिदीको लेने
निकल गया।
और ईस बात की जानकारी भी
मैने दिदी को दे दी।
ताकी वो निकलने की पुरी
तैय्यारी कर सके।
जब मै स्वातीदिदी के घर पे
पहुंच गया तो घर पे
दिदी और उसकी सांस ये
दोनोंही थे, घर मे
इन दोनोंके अलावा और कोइ भी
सदस्य नही था।
घर मे कोइ रहे ना रहे इससे
मुझे कोइ लेना देना नही था।
मुझे तो मेरी दिदी कि चाहत
थी।उसकी चुत ने
मुझे दिवाना कर दिया
था।दिदी के घर पहुंच्ने के
बाद
मै बहुत खुश था। मुझे देखते
ही दिदी पाणी ले कर आ गयी।
वो भी बहुत खुश दिख रही थी।
मै वहा पहुन्चने से पहले
ही दिदीने निकलने की पुरी
तय्यारी कर रखी थी।
दिदीने हमारे लिये चाय
बनाई। कुछ देर इधर उधर की
बाते होती रही,
चाय पिने के बाद हम लोग निकल
गये।
लेकीन दिदी की सास बोली,
“क्या कर रही है तू ?
अभी अभी तो आया है वो।
और तु लगेच उसे लेके जा रही
है। मै तुम्हे ऐसे थोडे ही
जाने दुंगी।
पहले कुछ खाओ पिओ और फ़िर
आराम से चले जाना।
तुम्हे मना कोन कर रहा है।”
उसकी बात खतम होने पर
मै मना करने लगा, लेकिन उसने
मेरी एक ना सुनी।
और फ़िर वो बाजार से कुछ लाने
के लिये चली गयी।
दिदीकी सास घरसे बाहर जाते
ही मै दिदी को लिपट गया।
मैने दिदी की एक बडी चुम्मी
ले ली।
और मै दिदीके बदन पे हाथ
फ़िराने लगा।
मदहोश होकर मै दिदीके बडे
बडे मम्मे दबाने लगा।
दिदीकी साँस फ़ुल गयी थी।
उसकी की वजह से दिदी के
मम्मे उपर नीचे हो रहे थे।
स्वातीदिदीने मेरा हाथ
पकड़ा और मुझे अपने बेडरुम
मे ले गयी ।
मैने दिदीको बेड पे लिटा
दिया और दिदीकी साडी उपर
करने लगा।
दिदीने निकर नही पहनी थी,
तो मैने दिदी से कहा,”दिदी
क्या तुम निकर नही पहनती हो?”

वो बोली,”अरे बुद्धू तुम
आनेवाले हो ये बात मुझे
मालुम थी ना,
ईसलिये तुम्हारे स्वागत के
लिये निकल रखी है।
और दिदीने मेरा हाथ आपनी
चुत पे रख दिया,
फ़िर मुझे अपने उपर खींच के
मुझे चूमने लगी।
मैने अब दिदीके पैरो के बीच
मे बैठ गया।
उ्सके पैरो को फैला कर उसकी
चूत को अपने हाथ से
फैला के उसकी चूत के अंदर
वाले हिस्से को देखने लगा।
दिदी बोली,आज इस चूत की
गर्मी बुझा दो।
मेरी चूत का कचूमर बना दो।
फ़िर मै दिदी के उपर हो गया और
जन्नत का मजा लेने लगा।
मैने कहा, “हम दोनो मे भाई
बहन का रिश्ता तो सिर्फ़
दुनियावालों के लिये है।
आसली मे तो हम पती पत्नी ही
है।”
तो दिदी बोली, ” नही रे मै तो
पुरी रंडी बन चुकी हू।
आज तक मैने ना जाने कितने
लंड को ठंड किया है।”
“लेकीन फ़िर भी तू बहूत बढीया
माल है।” मैने कहा।
अब दिदी की मुह से
सिस्कारीया निकल रही थी।
आआअहह चोदो आआअहह आआआअहह हा
हा।